रांची। ऑल इंडिया मोमिन कॉन्फ्रेंस ने झारखंड में लगातार सामने आ रही मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से विधानसभा के वर्तमान सत्र में मॉब लिंचिंग विरोधी कानून को संशोधित कर शीघ्र लागू करने की मांग की है।
संगठन के राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद सगीर अंसारी तथा रांची जिला अध्यक्ष शमीम अख्तर आजाद ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि हाल ही में चतरा जिले के टंडवा प्रखंड में हुई घटना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि कुछ असामाजिक तत्व कानून को अपने हाथ में लेने का दुस्साहस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं न केवल कानून के शासन को चुनौती देती हैं, बल्कि झारखंड की सामाजिक एकता, भाईचारे, धर्मनिरपेक्ष परंपरा और सांप्रदायिक सौहार्द को भी प्रभावित करती हैं।
नेताओं ने कहा कि मॉब लिंचिंग की घटनाओं में शामिल दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष और कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति कानून अपने हाथ में लेने का साहस न कर सके।
उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान प्रेम, भाईचारे, सहिष्णुता और विविधता की संस्कृति रही है। इस पहचान की रक्षा करना राज्य सरकार की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है। राज्य का प्रत्येक नागरिक—चाहे वह किसान, मजदूर, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक, पिछड़ा या अन्य कमजोर वर्ग से हो—उसे बिना किसी भय के सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जीने का अधिकार मिलना चाहिए।
ऑल इंडिया मोमिन कॉन्फ्रेंस ने सरकार और सभी विधायकों से अपील की कि विधानसभा के मॉनसून सत्र में इस गंभीर विषय पर प्राथमिकता के आधार पर चर्चा की जाए तथा राज्य में प्रभावी मॉब लिंचिंग विरोधी कानून लागू करने के लिए आवश्यक निर्णय लिया जाए।
संगठन ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति कानून का शासन है और किसी भी परिस्थिति में भीड़ को न्याय करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। संगठन ने राज्य सरकार से प्रभावी कानून और त्वरित न्याय व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि इससे झारखंड में शांति, सामाजिक सद्भाव, आपसी विश्वास और संविधान के मूल्यों की रक्षा मजबूत होगी।




