गिरिडीह I जिले में बाल विवाह की रोकथाम को लेकर बनवासी विकास आश्रम ने जिला प्रशासन से 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाली ग्राम सभाओं में ‘बाल विवाह मुक्त ग्राम’ बनाने का संकल्प पारित कराने की प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की है। संस्था के सचिव सुरेश कुमार शक्ति ने इस संबंध में उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी एवं जिला बाल विवाह निषेध पदाधिकारी, गिरिडीह को पत्र भेजकर सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।
संस्था ने पत्र में भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से 16 सितंबर 2026 को जारी पत्र का हवाला देते हुए कहा है कि देशभर में बाल विवाह की रोकथाम के लिए ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत 2 अक्टूबर को आयोजित विशेष ग्राम सभाओं में पात्र गांवों को ‘बाल विवाह मुक्त ग्राम’ घोषित करने के लिए विशेष संकल्प पारित कराने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
बाल अधिकार कार्यकर्ता सुरेश कुमार शक्ति ने कहा कि किसी गांव को ‘बाल विवाह मुक्त ग्राम’ घोषित करने में ग्राम सभा का संकल्प अहम कड़ी है। निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले गांवों में ग्राम सभा से संकल्प पारित होने के बाद संबंधित क्षेत्र के बाल विवाह निषेध पदाधिकारी द्वारा उसका सत्यापन किया जाना है। सत्यापन के बाद निर्धारित प्रमाण पत्र पर प्रखंड विकास पदाधिकारी, पंचायत प्रधान/मुखिया, पंचायत सचिव एवं जिला बाल विवाह निषेध पदाधिकारी के हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
पंचायत स्तर पर जागरूकता और निगरानी पर जोर
बनवासी विकास आश्रम ने प्रशासन से सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों, पंचायत सचिवों और मुखियाओं को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि 2 अक्टूबर की ग्राम सभाओं के एजेंडे में बाल विवाह रोकथाम और ‘बाल विवाह मुक्त ग्राम’ का संकल्प शामिल किया जा सके।
संस्था के अनुसार, जिन गांवों में अभियान शुरू होने की तिथि 1 जनवरी 2025 के बाद से बाल विवाह का कोई मामला सामने नहीं आया है और निर्धारित निगरानी तंत्र सक्रिय है, वहां नियमानुसार ग्राम सभा से संकल्प पारित कराया जा सकता है। इसके बाद सत्यापन और प्रमाणन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है।
प्रशासन को सहयोग करेगा बनवासी विकास आश्रम
संस्था ने कहा कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को खत्म करने के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए गांव और समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। बनवासी विकास आश्रम से जुड़े कार्यकर्ता और वालंटियर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने, बाल विवाह की निगरानी, समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और आवश्यक दस्तावेज तैयार करने में जिला प्रशासन का सहयोग करेंगे।
सुरेश कुमार शक्ति ने कहा कि जनप्रतिनिधियों, प्रशासन, आंगनबाड़ी सेविकाओं, शिक्षकों, किशोर-किशोरियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी से बाल विवाह के खिलाफ मजबूत सामाजिक माहौल बनाया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन के सहयोग से 2 अक्टूबर की ग्राम सभाओं के माध्यम से बाल विवाह रोकथाम का अभियान गांव-गांव तक और प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।
बनवासी विकास आश्रम ने जिला प्रशासन से पात्र गांवों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत ‘बाल विवाह मुक्त ग्राम’ संकल्प, सत्यापन और प्रमाणन की कार्रवाई समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया है। संस्था का कहना है कि इससे गिरिडीह जिले में बाल विवाह की रोकथाम के प्रयासों को जमीनी स्तर पर और मजबूती मिल सकेगी।




