चतरा I चतरा जिले में लंबे समय से भाकपा माओवादी और प्रतिबंधित संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) के बीच वर्चस्व को लेकर संघर्ष की स्थिति रही है। इसी बीच टीपीसी के कुख्यात कमांडर बर्जेश गंजू उर्फ गोपाल सिंह के मारे जाने से संगठन को बड़ा झटका लगने की बात सामने आई है। लगातार पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के कारण संगठन की गतिविधियों पर भी असर पड़ने का दावा किया जा रहा है।
बर्जेश गंजू के अलावा टीपीसी से जुड़े कई वरिष्ठ उग्रवादियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं, कुछ उग्रवादियों के आत्मसमर्पण करने और विभिन्न मुठभेड़ों में कुछ के मारे जाने की भी जानकारी सामने आई है। प्रमुख चेहरों के हटने से संगठन के सामने नेतृत्व और संचालन से जुड़ी चुनौती बढ़ने की स्थिति बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, बर्जेश गंजू उर्फ गोपाल सिंह को उत्तर प्रदेश एटीएस ने वाराणसी में हुई मुठभेड़ के दौरान मार गिराया। उस पर 30 लाख रुपये का इनाम घोषित बताया गया था। वह झारखंड के प्रतिबंधित नक्सली संगठन टीपीसी का कमांडर बताया जाता था। करीब आठ वर्ष पहले एनआईए ने टेरर फंडिंग से जुड़े मामले में उसे वांटेड घोषित किया था।
बताया गया कि रविवार सुबह करीब पांच बजे रामनगर थाना क्षेत्र में एटीएस की कार्रवाई हुई। एटीएस के डीएसपी विपिन राय के अनुसार, टीम को सूचना मिली थी कि एक नक्सली रामनगर के रास्ते मुगलसराय की ओर जाने वाला है। सूचना मिलने के बाद एटीएस टीम ने इलाके में घेराबंदी की।
इसी दौरान संदिग्ध बाइक से वहां पहुंचा। एटीएस टीम ने उसे रुकने का इशारा किया, जिसके बाद मुठभेड़ की स्थिति बनी। कार्रवाई के दौरान बर्जेश गंजू के मारे जाने की जानकारी सामने आई।
चतरा और आसपास के इलाकों में टीपीसी की गतिविधियों पर लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की नजर रही है। पुलिस की लगातार कार्रवाई में संगठन से जुड़े कई प्रमुख चेहरों के गिरफ्तार होने, आत्मसमर्पण करने या मारे जाने के बाद उसके नेटवर्क पर असर पड़ने की बात कही जा रही है। बर्जेश गंजू की मौत के बाद संगठन के नेतृत्व और आगे की गतिविधियों को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।




