चैनपुर I साहित्यिक संस्था ‘परिमल प्रवाह’ ने हिंदी दिवस के अवसर पर चैनपुर प्रखंड के कुसुमदाहा मंदिर परिसर में अपना 12वां स्थापना दिवस साहित्यिक गरिमा और उत्साह के साथ मनाया। झारखंड रत्न हरिवंश प्रभात की अध्यक्षता तथा डॉ विजय प्रसाद शुक्ल के संचालन में आयोजित समारोह में हिंदी भाषा, साहित्य और संस्कृति पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इस दौरान शिक्षक परशुराम तिवारी और डॉ अवधेश पाण्डेय को उनके साहित्यिक योगदान के लिए ‘परिमल प्रवाह साहित्य श्री सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
समारोह का उद्घाटन मुख्य अतिथि नारायण चंद्र अग्रवाल, विशिष्ट अतिथि मंदिर प्रबंधक सुनील कुमार सिंह, संरक्षक रवि शंकर पाण्डेय, संस्था अध्यक्ष सत्यनारायण तिवारी और सचिव विजय शंकर मिश्र ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती एवं मां भारती की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलित करते हुए किया। इसके बाद सचिव विजय शंकर मिश्र ने संस्था गीत प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को साहित्यिक रंग में रंग दिया।
साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मुख्य अतिथि एनसी अग्रवाल एवं परिमल प्रवाह के पदाधिकारियों ने शिक्षक परशुराम तिवारी और डॉ अवधेश पाण्डेय को ‘परिमल प्रवाह साहित्य श्री सम्मान’ प्रदान किया। दोनों साहित्यकारों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और शाल देकर सम्मानित किया गया।
‘हिंदी हमारी पहचान है, इसे बोलने में संकोच कैसा’
मुख्य अतिथि एनसी अग्रवाल ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा होने के साथ हमारी पहचान भी है। ऐसे में हिंदी बोलने में किसी तरह का संकोच नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, “बेझिझक हिंदी बोलिए।” उन्होंने विभिन्न कवियों, लेखकों और उनकी रचनाओं का उल्लेख करते हुए हिंदी भाषा के महत्व और उसकी व्यापकता पर प्रकाश डाला।
डॉ विजय प्रसाद शुक्ल ने कहा कि हिंदी के अस्तित्व से हमारा अस्तित्व जुड़ा हुआ है। इसलिए हिंदी को अपनाने और उसके प्रयोग पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने हिंदी के साथ संस्कृत और भारतीय संस्कृति के गहरे संबंध पर भी विस्तार से विचार रखा।
शिक्षक परशुराम तिवारी ने हिंदी की प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए कहा कि अनेक गैर-हिंदी भाषी महापुरुषों ने स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण में हिंदी की भूमिका को स्वीकार किया था। उन्होंने हिंदी को संपर्क और प्रगति की भाषा के रूप में अपनाने की वकालत की।
उन्होंने कहा कि विडंबना यह है कि हिंदी भाषी समाज के एक हिस्से में ही हिंदी के प्रति हीनभावना दिखाई देती है। इस मानसिकता से बाहर निकलने की जरूरत है। श्री तिवारी ने कहा कि हीनभावना के शूल निकालकर स्वाभिमान के साथ हिंदी का उपयोग करना चाहिए।
काव्य पाठ से देर तक गूंजता रहा साहित्यिक परिसर
समारोह के दूसरे सत्र में राजीव कुमार द्विवेदी के संचालन में हिंदी काव्य पाठ का आयोजन हुआ। इसमें वरिष्ठ कवि हरिवंश प्रभात, कवि एवं लोकतंत्र सेनानी रविशंकर पाण्डेय, प्रोफेसर आभा मुखर्जी, अरविंद कुमार सिन्हा, पूर्व सचिव उमेश कुमार पाठक रेणु, राजीव द्विवेदी, शायर एमजे अजहर, अमीन रहबर, कलाकार सैकत चट्टोपाध्याय, प्रयाग तिवारी, सिद्धेश्वर सिंह, वंदना श्रीवास्तव, रीना प्रेम दुबे, जया लक्ष्मी, आचार्य धनंजय पाठक, अमित कुमार विनि, संतोष दुबे, कमलनाथ तिवारी, प्रेम प्रकाश दुबे, मानस तिवारी, मनीष तिवारी, छेदी मिश्र नंदन, सुनील कुमार विश्वकर्मा उर्फ गांधीजी, चंद्रकांत सिंह, दीपक गुप्ता, ब्रजेश भावना सिंह, विजय कुमार ठाकुर और सुधाकर पांडे ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
कवियों और शायरों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों ने कुसुमदाहा मंदिर परिसर को देर तक काव्यमय बनाए रखा। हिंदी कविता, साहित्य और संस्कृति के विविध रंगों ने समारोह को यादगार बना दिया। कार्यक्रम के अंत में परिमल प्रवाह के अध्यक्ष सत्यनारायण तिवारी ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।




