मनीष सिन्हा
धनबाद : महज 1.1 किलोग्राम वजन के एक नवजात ने जिंदगी की मुश्किल जंग जीत ली। धनबाद के मातृ एवं नवजात शिशु देखभाल इकाई (एमएनसीयू) में 11 दिनों तक चले गहन और विशेषज्ञ उपचार के बाद टुंडी प्रखंड के परशाटांड निवासी नीता कुमारी और अशोक रविदास के नवजात को स्वस्थ होने पर सोमवार को सफलतापूर्वक डिस्चार्ज कर दिया गया।
उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन के निर्देश पर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल के लिए किए जा रहे प्रयासों का यह एक अहम उदाहरण है। जन्म के समय नवजात का वजन मात्र 1.1 किलोग्राम था और वह मां का दूध लेने में पूरी तरह असमर्थ था।
एमएनसीयू के प्रभारी डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि नवजात को विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में आवश्यक सहायक चिकित्सा उपलब्ध कराई गई। साथ ही नियमित रूप से कंगारू मदर केयर दिया गया, जिससे बच्चे की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार आने लगा।
11 दिनों के लगातार उपचार और देखभाल के बाद नवजात के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ। डॉ. नौशाद अली खान, डॉ. अजहर, डॉ. पल्लवी, डॉ. विश्वजीत और सिस्टर इंचार्ज उमा कुमारी के नेतृत्व में मेडिकल टीम ने उपचार किया। अब बच्चा सामान्य रूप से फीड ले रहा है और उसका वजन भी बढ़ना शुरू हो गया है।
ग्रामीण परिवार को मिली बेहतर स्वास्थ्य सुविधा
जिला प्रशासन के अनुसार, राज्य सरकार की ओर से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक गुणवत्तापूर्ण एवं नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व और स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के मार्गदर्शन में अस्पतालों तथा स्वास्थ्य केंद्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का काम किया जा रहा है।
धनबाद में उपायुक्त आदित्य रंजन की निगरानी में स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक और संवेदनशील बनाने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं। प्रशासन के मुताबिक सदर अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरतमंद मरीजों को शून्य लागत पर उच्चस्तरीय चिकित्सा उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गंभीर मामलों में यह व्यवस्था नवजातों और माताओं के उपचार में काफी मददगार साबित हो रही है।
परिवार ने मेडिकल टीम का जताया आभार
नवजात के स्वस्थ होकर घर लौटने पर परिजनों ने राहत की सांस ली। परिवार ने झारखंड सरकार, धनबाद जिला प्रशासन और अस्पताल की पूरी मेडिकल टीम के प्रति आभार जताया। 11 दिनों के उपचार के बाद बच्चे के स्वस्थ होने को परिवार ने किसी नई जिंदगी मिलने से कम नहीं माना।




