सिंदरी : झारखंड की खनिज संपदा और मजदूरों के हितों को लेकर झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन (JCMU), बीसीसीएल जोनल समिति ने केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध का ऐलान किया है। सिंदरी स्थित यूनियन कार्यालय में जोनल अध्यक्ष उमाशंकर चौहान की अध्यक्षता और जोनल सचिव रामू मंडल के संचालन में आपात बैठक हुई। इसमें ‘खान एवं खनिज संशोधन विधेयक, 2026’ को राज्य और श्रमिक हितों के खिलाफ बताते हुए आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई।
बैठक में यूनियन नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि झारखंड के जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। वक्ताओं ने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी प्राकृतिक संपदा और स्थानीय लोगों के अधिकारों से जुड़ी है। इन हितों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
रतिलाल टुडू ने दी आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी
जोनल उपाध्यक्ष रतिलाल टुडू ने कहा कि केंद्र सरकार को विधेयक के जनविरोधी प्रावधान वापस लेने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो मजदूर, किसान, रैयत, विस्थापित, आदिवासी और मूलवासी व्यापक आंदोलन कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में खनिजों की ढुलाई रोककर आर्थिक नाकेबंदी का रास्ता अपनाया जा सकता है। टुडू ने कहा कि मजदूर वर्ग अपने अधिकारों और झारखंड की खनिज संपदा की रक्षा के लिए पीछे नहीं हटेगा।
यूनियन ने केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर अपने पदाधिकारियों, खदान मजदूरों, विस्थापितों और राज्यवासियों से एकजुट होने की अपील की। संगठन ने कहा कि वह लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर सड़क से लेकर खदानों तक विरोध दर्ज कराएगा।
बैठक के अंत में सदस्यों और पदाधिकारियों ने झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों और मजदूर वर्ग के सम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
बैठक में “झारखंड की खनिज संपदा पर पहला अधिकार झारखंडवासियों का है”, “जमीन और खनिज—झारखंड की पहचान और अधिकार है” जैसे नारे भी लगाए गए। हालांकि, विधेयक के वास्तविक प्रावधानों और उसके प्रभाव को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों और सरकारी प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।




