चन्द्रदेव महतो की पहल रंग लाई, वन अधिकार के दावों पर शुरू हुई कार्रवाई

सिंदरी विधायक चन्द्रदेव महतो के विधानसभा में मुद्दा उठाने के बाद बलियापुर में वन पट्टा के लिए पात्र ग्रामीणों के आवेदन लेने हेतु विशेष कैंप लगाया जा रहा है।

मनीष सिन्हा

धनबाद : सिंदरी विधायक चन्द्रदेव महतो की पहल के बाद वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत वन पट्टा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को लेकर अब जमीनी स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई है। विधायक ने झारखंड विधानसभा के सत्र में गैर-सरकारी संकल्प के माध्यम से बलियापुर प्रखंड के शिवपुर एवं पहाड़पुर तथा गोविंदपुर प्रखंड की तिलैया पंचायत के ग्रामीणों को वन अधिकार का लाभ देने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।

विधानसभा में विधायक ने सरकार से मांग की थी कि वर्षों से वनभूमि पर निवास और जीविका चलाने वाले ग्रामीणों को उनके कानूनी वन अधिकार से वंचित नहीं किया जाए। उन्होंने वन पट्टा देने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने की मांग के साथ यह भी कहा था कि प्रक्रिया पूरी होने तक वन विभाग द्वारा ग्रामीणों के खिलाफ रोक, नोटिस, मुकदमा या किसी तरह की दमनात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।

अब गांवों में आयोजित होगा विशेष कैंप

विधानसभा में मामला उठाए जाने के बाद अंचल अधिकारी, बलियापुर की ओर से विशेष कैंप आयोजित करने की सूचना जारी की गई है। शिवपुर के पात्र ग्रामीणों के लिए पंचायत भवन, घड़बड़ तथा पहाड़पुर के पात्र ग्रामीणों के लिए पंचायत भवन, मिखराजपुर में कैंप लगाया जा रहा है।

इन कैंपों में पात्र ग्रामीण वन पट्टा प्राप्त करने के लिए अपने दावे से संबंधित आवेदन जमा कर सकेंगे। प्रशासनिक स्तर पर शुरू हुई इस पहल से लंबे समय से वन अधिकार की उम्मीद लगाए ग्रामीणों को राहत मिलने की संभावना है।

विधायक बोले- विधानसभा की आवाज अब जमीन पर पहुंची

विधायक चन्द्रदेव महतो ने कहा कि सदन में उठाई गई जनता की आवाज अब जमीन पर कार्रवाई में बदल रही है। उन्होंने कहा कि वनभूमि पर पीढ़ियों से रहने वाले ग्रामीणों को उनका अधिकार दिलाना उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए विधानसभा से लेकर गांव तक संघर्ष जारी रहेगा।

उन्होंने संबंधित ग्रामीणों से अपील की कि वे निर्धारित तिथि और स्थान पर आयोजित विशेष कैंप में पहुंचकर अपने वन अधिकार के दावे से संबंधित आवेदन अवश्य जमा करें।

वन पट्टा के मुद्दे पर शुरू हुई इस प्रक्रिया को विधायक ने जनता के अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासनिक प्रक्रिया के अगले चरण और वन अधिकार के दावों के निस्तारण पर टिकी है।

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