चंदवा : लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड की सासंग पंचायत स्थित बुल्हू गांव में बनहरदी कोल ब्लॉक परियोजना की पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन कॉलोनी के निर्माण के लिए जमीन देने का ग्रामीणों ने विरोध किया है। रविवार को ग्राम प्रधान दिलेश्वर गंझू की अध्यक्षता में आयोजित ग्रामसभा में जमीन नहीं देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। ग्रामीणों ने कहा कि जमीन अधिग्रहण से उनकी खेती-बाड़ी और आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है।
ग्रामसभा में ग्रामीणों ने अपनी चिंताएं रखते हुए कहा कि गांव के अधिकांश परिवार खेती-किसानी और मजदूरी के सहारे जीवनयापन करते हैं। उनके पास पहले से ही सीमित कृषि भूमि है, जिससे परिवार का भरण-पोषण करने के साथ बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च भी पूरा किया जाता है। ऐसे में यदि उनकी जमीन अधिग्रहित की जाती है, तो परिवारों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो सकता है।
बैठक में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन कॉलोनी के निर्माण के लिए अपनी जमीन देने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना था कि कृषि भूमि केवल आय का साधन नहीं, बल्कि परिवारों की आजीविका और भविष्य की सुरक्षा का आधार भी है। जमीन छिनने की स्थिति में उनके सामने रोजगार और परिवार चलाने की चुनौती बढ़ सकती है।
ग्रामसभा में तीन प्रमुख प्रस्ताव पारित
ग्रामसभा में पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन कॉलोनी के निर्माण के लिए जमीन नहीं देने, कृषि भूमि और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा जमीन पर अपने अधिकार बनाए रखते हुए परिवारों के भविष्य की रक्षा करने से संबंधित प्रस्ताव पारित किए गए।
ग्रामीणों ने कहा कि उनकी मांगों और चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। जमीन से जुड़े किसी भी निर्णय में उनकी आजीविका, कृषि पर निर्भरता और परिवारों के हितों को ध्यान में रखना जरूरी है।
ग्रामसभा में सकलदेव गंझू, प्रमिला देवी, सिकंदर गंझू, भुवनेश्वर गंझू, छेदी गंझू, रोहित गंझू, संदीप गंझू, धनेश्वर गंझू, शूकर गंझू और बलदेव गंझू समेत सैकड़ों महिला-पुरुष शामिल हुए। बैठक में पारित प्रस्ताव के बाद बनहरदी कोल परियोजना की पुनर्वास कॉलोनी के लिए जमीन उपलब्ध कराने के मुद्दे पर ग्रामीणों का विरोध सामने आया है।




