विलियम जैकब
गिरिडीह : बाल विवाह के खिलाफ लंबे समय से जमीनी स्तर पर अभियान चला रहे जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC) के सहयोगी संगठन बनवासी विकास आश्रम ने संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 27 नवंबर को ‘बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह की समाप्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस’ घोषित किए जाने का स्वागत किया है। बनवासी विकास आश्रम के सचिव सुरेश शक्ति ने इसे बाल विवाह के खिलाफ भारत में चल रहे नागरिक समाज के प्रयासों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
संगठन के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र का यह फैसला सरकार और प्रशासन के सहयोग से बाल विवाह के खिलाफ देशभर में अभियान चला रहे जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के लगातार और असाधारण प्रयासों को मिली वैश्विक मान्यता है। बनवासी विकास आश्रम भी JRC का सहयोगी संगठन है और संगठन लंबे समय से बाल विवाह के खिलाफ एक अलग अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किए जाने की मांग करता रहा है।
शिक्षक दिवस के मौके पर सुरेश शक्ति ने कहा कि भारत से उठी आवाज अब पूरी दुनिया का संकल्प बन गई है। उन्होंने कहा कि यह उनके संगठन के प्रयासों के साथ-साथ पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 27 नवंबर की तारीख का चयन भी भारत के बाल विवाह विरोधी अभियान से सीधे जुड़ा है। इसी दिन वर्ष 2024 में भारत सरकार ने JRC, बनवासी विकास आश्रम और अन्य नागरिक समाज संगठनों के सहयोग से ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान की शुरुआत की थी।
सुरेश शक्ति ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की घोषणा निश्चित रूप से गौरव का क्षण है, लेकिन केवल जश्न मनाकर रुक जाने का समय नहीं है। अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करने की है कि दुनिया के हर बच्चे को बाल विवाह से मुक्त बचपन मिले। उन्होंने कहा कि जब तक गिरिडीह जिले के किसी गांव का एक भी बच्चा बाल विवाह के खतरे में जी रहा है, तब तक यह लड़ाई पूरी नहीं मानी जा सकती।
उन्होंने बताया कि गिरिडीह जिले में सरकार और प्रशासन के साथ मिलकर कानूनी हस्तक्षेप के माध्यम से अब तक एक हजार से अधिक बाल विवाह रुकवाए जा चुके हैं।
वैश्विक दिवस की पहल कैसे आगे बढ़ी
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक और वरिष्ठ अधिवक्ता भुवन ऋभु ने बाल विवाह के खात्मे के लिए एक अलग अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किए जाने की पहल की थी। मार्च 2026 में संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एक बार फिर बाल विवाह के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने के लिए प्रस्ताव लाने की बात कही थी।
उस समय अफ्रीकी देश सिएरा लियोन की फर्स्ट लेडी डॉ. फातिमा मादा बायो भी मौजूद थीं और उन्होंने इस पहल का समर्थन किया। इसके बाद सिएरा लियोन ने भारत समेत करीब 50 देशों के समर्थन वाला प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किया। प्रस्ताव में 27 नवंबर को बाल विवाह समाप्त करने के लिए समर्पित वैश्विक दिवस घोषित करने की मांग की गई थी।
4 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र ने इस प्रस्ताव को पारित कर दिया, जिसके बाद 27 नवंबर को बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह की समाप्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का रास्ता साफ हो गया।
782 जिलों में चल रहा अभियान
JRC अपने सहयोगी संगठनों के साथ भारत के सभी 782 जिलों में बाल विवाह के खिलाफ अभियान चला रहा है। संगठन के अनुसार, सरकारों और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से समुदायों, स्कूलों, पंचायतों, आदिवासी और वंचित समुदायों, महिलाओं, पुलिसकर्मियों, धर्मगुरुओं और जनप्रतिनिधियों को इस अभियान से जोड़ा गया है।
JRC के सहयोगी संगठनों का दावा है कि उनके प्रयासों से देशभर में 5,50,000 से अधिक बाल विवाह रुकवाए गए हैं। संगठन इसे इस बात का प्रमाण मानता है कि सरकार, नागरिक समाज और समुदाय मिलकर काम करें तो बाल विवाह को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है और अंततः इसे पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।




