मनीष सिन्हा
धनबाद/रांची : झरिया विधानसभा क्षेत्र समेत धनबाद जिले में दामोदर नदी, जलभराव वाले इलाकों और परित्यक्त कोयला खदानों में जमा पानी से पैदा होने वाली आकस्मिक घटनाओं को लेकर झरिया विधायक रागिनी सिंह ने विधानसभा के मानसून सत्र में गंभीर सवाल उठाया। उन्होंने आपदा की स्थिति में तत्काल राहत और बचाव के लिए स्थानीय गोताखोरों के स्थायी समायोजन के साथ धनबाद में NDRF की स्थायी व्यवस्था करने की मांग की।
विधायक के तारांकित प्रश्न के जवाब में सरकार ने स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन की तैयारियों से जुड़े कई पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट की।
स्थानीय गोताखोरों और NDRF को लेकर उठाया सवाल
रागिनी सिंह ने सरकार से पूछा कि क्या यह सही है कि झरिया विधानसभा क्षेत्र सहित धनबाद जिला कोयला उत्खनन वाला इलाका है, जहां दामोदर नदी के अलावा खाली पड़ी कोयला खदानों में पानी जमा रहता है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में आपात स्थिति उत्पन्न होने पर स्थानीय गोताखोरों की मदद ली जाती है, लेकिन उनका स्थायी समायोजन नहीं किया गया है।
उन्होंने धनबाद जिला मुख्यालय में NDRF का स्थायी कार्यालय नहीं होने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इससे आकस्मिक घटनाओं के दौरान तत्काल बचाव अभियान चलाने में कठिनाई हो सकती है।
47 गोताखोरों को दिया जा रहा Deep Diving प्रशिक्षण
सरकार की ओर से आपदा प्रबंधन विभाग ने पहले सवाल का स्वीकारात्मक जवाब दिया। स्थानीय गोताखोरों की उपलब्धता और NDRF कार्यालय से जुड़े सवालों पर सरकार की ओर से आंशिक स्वीकारात्मक जवाब दिया गया।
सरकार ने बताया कि आपदा प्रबंधन प्रभाग स्तर पर धनबाद सहित अन्य जिलों के दो-दो गोताखोरों को मिलाकर कुल 47 गोताखोरों को Deep Diving का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन गोताखोरों का बीमा भी कराया जा चुका है।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अपेक्षित उपकरणों से लैस प्रशिक्षित गोताखोरों को घटना की प्रकृति के अनुसार 10 हजार रुपये तक की निर्धारित प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान भी बताया गया है।
NDRF की स्थायी तैनाती पर फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं
हालांकि रागिनी सिंह की सबसे अहम मांग धनबाद में NDRF की स्थायी तैनाती को लेकर थी। इस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि धनबाद जिले में NDRF की स्थायी प्रतिनियुक्ति के संबंध में फिलहाल सरकार के समक्ष कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
सरकार के इस जवाब पर रागिनी सिंह ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि धनबाद और विशेषकर झरिया की भौगोलिक परिस्थितियां सामान्य जिलों से अलग हैं। यहां बड़े पैमाने पर कोयला खनन, भूमिगत खदानें, परित्यक्त खदानों में जमा पानी और दामोदर नदी जैसे जलस्रोत मौजूद हैं।
‘बाहर से राहत दल के पहुंचने का इंतजार जोखिमपूर्ण’
विधायक ने कहा कि किसी भी आकस्मिक घटना के दौरान तत्काल प्रशिक्षित बचाव दल की उपलब्धता बेहद जरूरी है। दुर्घटना होने के बाद बाहर से राहत दल के पहुंचने का इंतजार करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशिक्षित गोताखोरों को स्थायी व्यवस्था से जोड़ने और धनबाद में NDRF की स्थायी इकाई स्थापित करने से बचाव कार्य में महत्वपूर्ण समय बचाया जा सकता है। इससे संभावित जान-माल के नुकसान को भी कम करने में मदद मिलेगी।
पूरे धनबाद की आपदा तैयारी से जुड़ा मुद्दा
रागिनी सिंह की ओर से विधानसभा में उठाया गया यह सवाल केवल झरिया विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। धनबाद की खनन-प्रधान भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यह पूरे जिले की आपदा तैयारी और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
सरकार ने 47 गोताखोरों को प्रशिक्षण देने और उनका बीमा कराने की जानकारी देकर तत्काल आपदा प्रतिक्रिया की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को सामने रखा है। हालांकि धनबाद में NDRF की स्थायी तैनाती को लेकर कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं होने का जवाब आने वाले दिनों में चर्चा का विषय बन सकता है।
अब सवाल यह है कि धनबाद जैसे खनन प्रभावित जिले में आपदा आने के बाद राहत और बचाव की व्यवस्था पर निर्भर रहा जाए या उससे पहले ही स्थायी और सक्षम बचाव तंत्र तैयार किया जाए। विधायक रागिनी सिंह की मांग ने इसी मुद्दे को विधानसभा के केंद्र में ला दिया है।




