बीरेन्द्र कुमार राना
रामगढ़ : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पूजनीय माता दिवंगत रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार गुरुवार को उनके पैतृक गांव नेमरा स्थित श्मशान घाट पर पूरे सम्मान और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अश्रुपूर्ण आंखों से अपनी माता को अंतिम विदाई दी और उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के दौरान नेमरा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गईं और पूरा माहौल शोक में डूब गया।
अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब
दिवंगत रूपी सोरेन के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन और उन्हें विदाई देने के लिए नेमरा में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। दूर-दराज के इलाकों से आए ग्रामीणों के साथ समर्थक, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक अधिकारी भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
बड़ी संख्या में लोग शव यात्रा के साथ श्मशान घाट तक पहुंचे। हर कोई दिवंगत रूपी सोरेन का अंतिम दर्शन कर उन्हें नम आंखों से विदाई देना चाहता था। अंतिम विदाई के दौरान नेमरा का माहौल पूरी तरह गमगीन रहा। गांव के लगभग हर घर से लोग इस दुख की घड़ी में शामिल हुए और रूपी सोरेन के व्यक्तित्व और जीवन से जुड़ी यादों को साझा करते नजर आए।
सादगी, त्याग और संघर्ष की मिसाल थीं रूपी सोरेन
दिवंगत रूपी सोरेन को झारखंड आंदोलन के दौर से लेकर आज तक सादगी, त्याग और संघर्ष की मिसाल के रूप में याद किया गया। उन्होंने अपने पारिवारिक दायित्वों को पूरी जिम्मेदारी से निभाने के साथ समाज के लिए भी अभिभावक जैसी भूमिका निभाई।
उनके निधन से झारखंड ने एक ममतामयी मां और मार्गदर्शक को खो दिया है। उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
लोगों ने दिवंगत रूपी सोरेन की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में दुख सहने की शक्ति देने की कामना की। अंतिम विदाई के दौरान नेमरा में हर ओर भावुकता और शोक का माहौल दिखाई दिया।


